योग के बारे में सम्पूर्ण जानकारी एक ही मंच पर | योग सीखना अब हुआ बहुत ही असान |

दोस्तों, आजकल की अत्यधिक व्यस्त और बोझिल जीवनशैली की वजह से मन में हमेशा एक ही विचार आता है कि कैसे शरीर और मन को कम से कम समय मे रिलैक्स और फिर से तरोताज़ा किया जाए ? और क्या ऐसा संभव है ?

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बिल्कुल संभव है ! शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए “योग” (yoga in hindi) ही एक समाधान है। अब प्रश्न यह है की योग क्या है? योग के प्रकार क्या है? और योग कैसे सीखें ?

अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे है तो आज इस लेख मे आपको इन सभी प्रश्नों का पूर्ण समाधान मिल सकता है अगर आप अंत तक ब्लॉग मे बने रहेंगे | तो आईए इन सभी बिन्दुओं निम्नलिखित विषय सूची से स्टेप by स्टेप समझने की सफ़ल कोशिश करते है।

विषय सूची :-

    1. योग क्या है ? (What is yoga in hindi)
    2. योग के प्रकार (Types of yoga in hindi)
    3. प्राणायाम के प्रकार (Pranayama in hindi)
    4. आसनों के प्रकार (Yogasana in hindi)
    5. योग कैसे सीखें (yoga kaise karte hain)

योग क्या है ?  (yoga kya hai):-

योग, संस्कृत भाषा के “युज” शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है “एकजुट करना या एकीकृत करना” | योग का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक व्यायाम से शरीर, मन और आत्मा को एकजुट करना है। योग के आसन, प्राणायाम और मुद्रा का नियमित अभ्यास से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के स्वास्थ्य सुख को प्राप्त किया जा सकता है।

योग का इतिहास मनुष्य जाति के उद्भव से ही है पर व्यवस्थित योग महर्षि पतंजलि और घेरण्ड मुनि की देन माना जाता है। योग के सभी प्रारूपों का विस्तरित उल्लेख योगसूत्र, घेरण्डसंहिता ,हठयोग प्रदीपका और शिव संहिता आदि ग्रंथो में है।

योगासन  को करने का तरीका (विधि) और समझने का तरीका प्राचीन काल से आधुनिक काल (19वीं शताब्दी के बाद) में समय के साथ-साथ बदलता गया | पर योग का मूल आधार समान रहा जो की शरीर और मन को एकजुट करने के लिए आसनों, प्राणायामों और मैडिटेशन का नियमित रूप से अभ्यास करना है।

योग के प्रकार (Types of yoga in hindi):-

जैसा की हमने देखा की योग करने की विधि और समझने का तरीका समय के साथ बदलता गया | इसलिए योग की सभी विधाओं को समझने के लिए हम योग के प्रकारों (Types of yoga in hindi) को 12 भागों मे समझने का सफल प्रयास करेंगे |

1. प्राचीन योग :- यह योग विधा मनुष्य के स्वाभाव और व्यवहार (Behaivour) पर आधारित है। जैसे भक्ति योग उन लोगों के लिए था जिनका पूजा-पाठ और ईश्वर मे मन लगता था | ज्ञान योग ,पुराना और नया ज्ञान की प्राप्ति के लिए | और राजयोग सभी वर्ग के लिए जिन्हें शारीरिक और मानसिक व्यायाम करने मे रूचि है।

2. अष्टांग योग :- यह योग विधा, सभी योग के प्रकारों का मूल आधार और प्रचलित विधि है। जिसमें व्यक्ति को 8 चरणों मे योग का सार और लाभ सिखाया जाता है। इसके 8 चरण (Steps) होने के वजह से इसे महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग नाम दिया |

(i) यम :- इस चरण मे समाजिक अनुशासन और व्यवहार सीखा जाता है।

(ii) नियम :- इसमें व्यक्ति को आत्म अनुशासन (self discipline) सिखाया जाता है।

(iii) आसन :- शारीरिक व्यायाम द्वारा शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाया जाता है।

(iv) प्राणायम :- नाड़ी शोधन और जागरण के लिए स्वांस (साँसों) का व्यायाम |

(v) प्रत्याहार :- शरीर की पांचो इंद्रियों (आखं, कान, जीभ, नाक और त्वचा) पर नियंत्रण और संयम |

(vi) धारणा :- मन को एकाग्र (Concentrate) करने का अभ्यास|

(vii) ध्यान :- लक्ष्य को पूर्ण निष्ठा से मन में केन्द्रित (Devotion) करना |

(viii) समाधि :- व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारीयों को पूर्ण करने के बाद मोक्ष सुख को प्राप्त करना |

अष्टांग योग का अभ्यास शुरूआती (Bigneers) और नए लोगों के लिए उत्तम है।

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3. हठ योग :- योग की यह विधा अष्टांग योग का ही एक दूसरा प्रारूप है। हठ योग मे बल पूर्वक शरीर के अंगों की गतिविधियों के विपरीत दिशा और समान दिशा मे विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास किया जाता है। बाबा रामदेव का योग हठ योग पर ही आधारित है। जैसे सूर्यनमस्कार, हस्त-पादासन आदि |

4. पावर योग :- इस योग विधा मे आसनों और प्राणायाम को करने की जटिलता बढ़ जाती है। अत: अष्टांग और हट योग मे अभ्यस्त होने के पश्चात ही पॉवर योग के लिए जाना चाहिए|

5. बिक्रम योग या हॉट योगा :-

YOGA IN HINDI

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हॉट योगा पूरे शरीर को डीटोक्स करने की उत्तम योग विधि है। हॉट योग मे 26 आसनों और 2 प्राणायामों का अभ्यास एक गरम बंद कमरे मे 90 मिनट मे किया जाता है। कमरे का तापमान 105 °F (41 °C) और आद्रता (Humidity) 40 % तक होती है। इस योग विधि मे शरीर से पसीना बहुत ज्यादा आता है जिससे शरीर की आन्तरिक सफाई बहुत अच्छे से होती है।

हॉट योग विधा का प्रचलन 70 के दशक मे बिक्रम चौधरी ने अमेरिका (USA) मे किया था | और आज पूरे विश्व मे यह बिक्रम योग और हॉट योग के नाम से संचालित है।

6. अयंगर योग (Iyanger yog) :-

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योग की इस विधि के संस्थापक स्वर्गीय बी.के.स अयंगर है। इस योग विधा में आसनों का सही पोजीशन में अभ्यास करने के लिए ब्लॉक, बेल्ट, रस्सी और लकड़ी की बनी चीजें का उपयोग सहारा (support) लेने के लिए किया जाता है। अयंगर योग कम कुशाग्र और किसी पूरानी चोट से ग्रस्त लोगों के लिए बहुत ही उतम है।

7. यिन योग (Yin Yog) :- यिन योग एक धीमी-गति (स्लो पेस) योग स्टाइल है। इसमें योग आसनों का अभ्यास एक ठहराव के साथ कम से कम 2 से 3 मिनट के समय तक किया जाता है। जो की शरीर के हर एक जॉइंट को रिलैक्स और शरीर में संतुलन कर देता है।

8. कुंडलिनी योग (Kundli Yog) :- कुंडलिनी योग में प्राणायाम पर गहन फ़ोकस किया जाता है। हमारे शरीर में ऊर्जा संचार और जागरण के 7 ऊर्जा चक्रा होते है। जो की सहस्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपूर, स्वाधिष्ठान और मूलाधार है। हर ऊर्जा चक्र से अलग-अलग प्रकार की शक्ति शरीर को मिलती है। कुंडलिनी योग इंगला,पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी को सक्रीय करके सभी ऊर्जा चक्रों को जाग्रत करता है।

9. प्रीनेटल योग (Prenatal Yog) :- योग के प्रकारइस योग स्टाइल को गर्भधारण के समयकाल में गर्भवती महिलाओं के शारीरिक और मानसिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन और थकान आदि को दूर करने के लिए डिजाईन किया गया है। इस योग विधा में कुछ आसन योग आसन और प्राणायाम एक अच्छे और अनभवी योग ट्रेनर की देखरेख में कराया जाता है। जैसे- बद्धकोणासन,कोणासन ,भ्रमरी प्राणायाम आदि |

10. विन्यास योग (Vinayasa yog) :- yogasana in hindiविन्यास योग हठ-योग का ही भाग है। इसकी विशेषता यह है की इस योग विधा में आसन, श्वास और द्रिष्टि तीनों (Tristhana practice) का क्रमबद्ध समायोजन किया जाता है। विन्यास योग दो-दो अलग योग आसनों को क्रमबद्ध तरीके से करने पर फ़ोकस करता है। जैसे- वीरभद्रासन आसना-2 के साथ कोणासन का अभ्यास आदि|

11. एरियल योग (Aerial Yoga) :- yogasana in hindiयोग की इस तकनीक में आसनों का अभ्यास ऊपर खूंटे से बंधे कपडें या रस्सी से शरीर को लपेटकर कर जमीन से ऊपर किया जाता है। इसलिए इस योग विधा को “एंटी-ग्रेविटी” योग भी कहा जाता है। इसमें मुश्किल आसनों को करने के लिए शरीर में संतुलन और लचीलापन होना आवश्यक है।

12. थेरेपी योग (Therapy yoga) :- आज के समय में बहुत सी आसध्य बिमारियों जैसे कैंसर, मधुमेह आदि का इलाज़ थेरेपी योग से किया जाता है। थेरेपी योग उपरोक्त सभी योग विधियों का समावेश है जिसमें क्रमबद्ध तरीके से आसनों ,प्राणायाम और मैडिटेशन का अभ्यास औषधियों के साथ कराया जाता है।

इस प्रकार योग कितने प्रकार के होते, इस बात को उपरोक्त वर्णित योग के प्रकार से अब हम अच्छी तरह समझ गए है। उपरोक्त लेख मे हमने कई बार आसन और प्राणायाम शब्द का उपयोग किया | पर अब यह जानना भी ज़रूरी है की आसनों के प्रकार क्या है? और प्राणायाम के प्रकार क्या है? तो आईए लगे हाथ इन्हें भी समझ लेते है।  

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प्राणायाम के प्रकार (Pranayama in hindi) :-

प्राणायाम का आधार हमारी श्वास (श्वसन क्रिया) है जो की हमारे जीवन का प्राण आधार है।  है। प्राणायाम स्नायु और श्वसन तंत्र (Breathing Technic) का व्यायाम है। प्राणायाम के द्वारा शरीर की सभी नाड़ियो का शोधन (सफाई) होती है।

इस लेख में प्राणायामों का संक्षिप्त विवरण बताया गया है विस्तार से जानकारी के लिए विडियो और ब्लॉग लिंक पर क्लिक ज़रूर करे | आईए, प्रमुख प्राणायाम के प्रकार को समझते है।

(i) अनुलोम विलोम प्राणायाम :- नाड़ी शोधन प्राणायाम (Anulom Vilom Pranyama) साँस लेने की तकनीक मे सुधार का क्रम है जो इन अवरुद्ध ऊर्जा चैनलों (नाड़ियो) को साफ करने में मदद करती है। जिससे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

(ii) कपालभाती प्राणायाम :- Kaplabhati एक श्वसन योगिक क्रिया है जिसमे नाक के द्वारा सांस को तेज़ गति से छोड़ कर तेज़ी से पेट का संकुचन और फैलाव करते है।

(iii) भ्रामरी प्राणायाम :- मानसिक तनाव और सिरदर्द को पलभर में दूर करने के लिए यह प्रणायाम सबसे अधिक कारागार है। इसमें आराम से बैठ कर श्वास (Breath) के लयबद्ध तरीके से भ्रमर की तरह गुंजन करते है।

(iv) भस्त्रिका प्राणायाम :- इस प्राणायाम में तेज़ गति से साँसों को लिया जाता है और तेज़ गति से साँसों को छोड़ा जाता है जिससे पूरा श्वसन तंत्र रिलैक्स और डेटोक्स होता है।

(v) उज्जायी प्राणायाम :- यह प्राणयाम थाइरोइड रोगियों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

(vi) चन्द्रभेदी और सूर्यभेदी प्राणायाम :- श्वास क्रिया द्वारा शरीर को गर्माहट और शीतलता प्राणायाम के इस प्रकार से मिलती है।

(vii) अग्निसार क्रिया :- यह प्राणायाम गहन बलपूर्वक पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ और विस्तार करके सांस लेनी और छोड़ने की तकनीक है।

दोस्तों, इस प्रकार प्राणायाम के सभी प्रकारों का उद्देश्य श्वास (improve Breathing pattern) लेने और छोड़ने की अवधि को बढ़ाना है जिससे शरीर को अधिक से अधिक प्राणवायु ऑक्सीजन मिल सके और हानिकारक गैसें शरीर से बहार जा सके |

आसनों के प्रकार (Yogasana in hindi) :-

योग आसन एक शारीरिक व्यायाम की विधि है जिसके द्वारा शरीर को सुडौल और फुर्तीला बनाया जाता है।

इस लेख में आसनों के प्रकार का संक्षिप्त विवरण बताया गया है विस्तार से जानकारी के लिए विडियो और ब्लॉग लिंक पर क्लिक ज़रूर करे | तो दोस्तों, आईए कुछ प्रमुख योगासनों को समझते है।

(a) सूर्यनमस्कार :- इस एक आसन से पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। क्योंकि यह 12 आसनों का सम्मलित आसन है।

यह भी ज़रूर पढ़े – सूर्यनमस्कार के 12 स्टेप को ज़रूर समझे |

(b) भुजंगासन :- यह आसन रीढ़ की हड्डी और गर्दन के निचले भाग को लचीला और मजबुत बनाता है।

यह भी ज़रूर पढ़े – भुजंगासन से कमर दर्द से तुरन्त आराम |

(c) सर्वांगासन :- सर्वांगासन में पैर ऊपर की तरफ होने की वजह से गुरुत्वाकर्षण के कारण रक्त का flow विपरीत दिशा मे पैरों से मस्तिष्क की ओर अच्छा होता हैं।

(d) पवनमुक्तासन :- यह आसन पीठ के बल लेट कर किया जाने वाला योगासन हैं। इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट की आंतों का अच्छा अभ्यास होता है जिससे यह पेट की कब्ज और गैस को दूर करने मे बहुत सहायक है।

(e) ताड़ासन :- यह खड़े होकर किया जाने वाला आसन है। ताड़ासन योग में दोनों हाथों को ऊपर की तरफ खींच कर पूरे शरीर को स्ट्रेच किया जाता है। इसलिए इस योग से सभी अंगों और मांसपेशियों का व्यायाम एक ही बार मे हो जाता है।

(f) पश्चिमोत्तानासन :- इस आसन में बैठ कर दोनों हाथों को ऊपर से नीचे पैरों की तरफ खींच कर पूरे शरीर को स्ट्रेच किया जाता है। कमर दर्द के लिए यह आसन बहुत ही उपयुक्त है।

(g) बालासन :- यह आसन भी बैठ कर किया जाने वाला रिलैक्सिंग योग आसन है।

(h) धनुरासन :- आसनों के सभी प्रकारों मे यह आसन सबसे अधिक लाभदायक है। क्योंकि इस आसन से तनाव, चिंता और शारीरक दर्द से तुरन्त राहत मिलती है।

(i) वीरासन :- आज की आधुनिक और व्यस्त दिनचर्या बहुत ही थाकानदायक और तानवपूर्ण है। जिससे मुक्ति पाने मे वीरासन(veersana) योग बहुत ही आसान और उत्तम उपाय है।

दोस्तों, ओर अधिक आसनों के प्रकार की जानकारी के लिए निम्नलिखित ब्लॉग को भी ज़रूर पढ़े |

100 से भी अधिक आसनों और प्राणायामों के प्रकार की लिस्ट

मित्रों, इस लेख में हमने योग क्या है ? योग के प्रकार क्या है ? यह तो समझ लिया बस अब योग कैसे सीखें ? यह रह गया | तो चलिए इसे भी समझ लेते है !

योग कैसे सीखें (yoga kaise karte hain) :-

योग कैसे करते है ? इसे सीखने के लिए हमें एक अच्छे और अनुभवी योग प्रशिक्षक से ट्रेनिंग लेनी होगी | क्योंकि हर योग विधा को करने का सुनियोजित तरीका होता है। जिसकी टिप्स एक ट्रेनर ही दे सकता है। योग एक स्वास्थ्य विज्ञानं है अगर इसे गलत तरीके से करते तो नुकसान भी हो सकता है। अत: योग को सीखने के लिए सर्वप्रथम एक अच्छा योग सेन्टर और योगा ट्रेनर को ज्वाइन करे | और बाद में आप ऑनलाइन भी योग सीख सकते है।

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योग का प्रथम नियम है की, यह खाली पेट किया जाता है। और हर योग आसन और प्राणायाम को अपनी सामर्थ्य के अनुसार योग ट्रेनर की देख रेख में ही करना चाहिए | योग की शुरुआत करने से पहले सूक्ष्म (हल्का) व्यायाम करना चाहिए | फिर धीरे-धीरे आसनों और प्राणायामों में अभ्यस्त होकर जटिल आसनों और प्राणायामों का अभ्यास करना चाहिए |

दोस्तों, आशा करते है के आप को इस लेख मे योग के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त हुई | अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में ज़रूर करे ताकि अगले लेख को और भी बेहतर और जानकारीपूर्ण बनाया जा सके |

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Blog by – Anil Ramola

 

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